स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक कैसे लिखें

स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक कैसे लिखें

 अगर आप सभी महिलाएं स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहती हैं तो आप सभी महिलाओं को हमारा ही आर्टिकल पूरा पढ़ना होगा आज के इस आर्टिकल में आप सभी महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के नगद पुस्तक के बारे में बताएंगे आइए जानते हैं विस्तार से

 

स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक किसे कहते हैं

 अगर आप सभी महिलाएं स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप सभी महिलाओं को सबसे पहले नगर पुस्तक के बारे में जानकारी प्राप्त होनी चाहिए आप सभी महिलाओं को मैं बता दूं कि लेनदेन खाता शीर्षक के अनुसार लिखने वाली पुस्तक को नगद पुस्तक कहते हैं

 स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक के फायदे

  •  स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक लिखने से समूह को प्रारंभिक शेष राशि और अंतिम शेष राशि का पता चलता है
  •  स्वयं सहायता समूह में प्रत्येक बैठक में प्राप्त और भुगतान का विवरण सभी सदस्यों को पता चलता है
  •  स्वयं सहायता समूह में हर खाता शीर्षक को कितना राशि प्राप्त हुआ है और कितना भुगतान हुआ है इसकी जानकारी नगद पुस्तक से होती है
  •  स्वयं सहायता समूह में प्रत्येक पुस्तक के अनुसार साधारण खाता बही लिखना चाहिए

 स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक लिखते समय ध्यान देने वाली बातें

 1. समूह में बैठक हुए हर दिन नगद पुस्तक लिखना जरूरी है। 

2. नगद पुस्तक में बाई तरफ प्राप्त दाई तरफ भुगतान लिखना है।
3. प्राप्त और भुगतान अलग अलग लिखना है।
4. प्राप्ति कुल में से भुगतान निकाल के अंतिम शेष राशि लिखना है।
5. स्वयं सहायता समूह की लेखपाल को उसी साधारण खाता बही पर खाता शीर्षक को साधारण खाता बही के सामने नगद पुस्तक में पत्र संख्या लिखना चाहिए
6. समूह का मोहर लगाकर पदादिकारियों से हस्ताक्षर करवाना है।
7. पुस्तक संचालक बाई तरफ हस्ताक्षर करना है।

 स्वयं सहायता समूह में नगद पुस्तक का अभ्यास

 श्री साइबाबा महिला समूह 23-11-2001 दिनांक को जे 76 बैठक मे चला था। उस बैठक के विवरण नीचे दिये गये है। उनको नगद पुस्तक लिखकर शेष तय कीजिये।पिछले बैठक में अंत शेष राशी रू 50/- इस बैठक में 12 सदस्य से रू 10/- के अनुसार रू 120/- तीन सदस्य रू 20/- के अनुसार बचत भुगतान किया।

नीचे के सदस्य ऋण भुगतान किया

1. शारदम्मा असल रू 300 ब्याज रू 6 खेतीबारी के खुर्च लिए
2. नवनीतम्मा असल रू 200 ब्याज रू 4 दाना खरीदने के लिए

3. लक्ष्मम्मा असल रू 250 ब्याज रू 20 टोकरियों की कारोबार के लिए
4 रामुलम्मा असल रू 200 ब्याज रू 60 भेड के पालन के लिए ऋण भुगतान किया ।

ग्राम संगठन से मिले रू 30,000चेक नंबर 555222 के व्दारा बैंक में डाले गये है। नीलम्मा ऋण भुगतान ना देने के कारण जुर्माना के रूप में रू 10 भुगतान किया। बैक वाले बैंक जामा शेष  ब्याज के रूप में रू 30 को बैंक पास पुस्तक में जमा किये ।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.