स्वयं सहायता समूह में ऋण पुस्तक कैसे लिखते है

स्वयं सहायता समूह में ऋण पुस्तक
स्वयं सहायता समूह में ऋण पुस्तक

 

स्वयं सहायता समूह में ऋण पुस्तक किसे कहते है
 
 
स्वयं सहायता समूह की वह दिदिया जो छोटी छोटी जरूरतों के लिए उधार लेती है जैसे – दवाई के लिए ,राशन के लिए ,कपड़ा के लिए ,अपने आवश्यकता अनुसार  और वह दिदिया जो बड़े बड़े जरूरतों के लिए उधार लेती है जैसे – लड़की के सादी के लिए ,भैस के लिए ,घर के लिए ,इत्यादि |इस लेन  देन  को पुरे विस्तार से इस प्रक्रिया को पुस्तक में  लिखने को “ऋण पुस्तक” कहते है



 
 
स्वयं सहायता समूह में ऋण पुस्तक  लिखने के फायदे ;
 
स्वयं सहायता समूह की हर सदस्य को कितनी बार छोटी जरूरतों के लिए और बड़ी जरूरतों के लिए कितनी बार उधार लेती है इस बात का पता चलता है 
स्वयं सहायता समूह की हर सदस्य अब तक कितनी बार कर्ज ली है इस बात का भी पता चलता है 
 
स्वयं सहायता समूह की हर सदस्य जिस काम के कर्ज ली है उस काम के लिए इस्तमाल की है की नहीं इस बात का भी पता चलता है 
 
स्वयं सहायता समूह की हर सदस्य की  माँग के अनुसार जब ऋण वापस करने आती है तो ब्याज और बकाया पता चलता है
स्वयं सहायता समूह के ऊपर उधार का  बचा हुआ  पैसा समूह का पैसा होता है इस का खुलासा पुस्तक में मिलता है 
 
 
 

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